Jazim Sharma
सुंदर सुजान कृपा निधान अनाथ पर कर प्रीति जो।सो एक राम अकाम हित निर्बानप्रद सम आन को॥जाकी कृपा लवलेस ते मतिमंद तुलसीदासहूँ।पायो परम बिश्रामु राम समान प्रभु नाहीं कहूँ॥3॥